Rītikālīna śr̥ṅgāra-bhāvanā ke srota

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Svarāja Prakāśana, 1999 - Literary Criticism - 381 pages
Sources of aesthetics in Hindi poetry of Riti period, 17th to 19th century; a study.

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Contents

पांस अध्याय
7
111
60
तृतीय अध्याय है
63
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Common terms and phrases

अथवा अधिक अनेक अन्य अपना अपनी अपने आदि इन इस इसलिए इसी उदाहरण उनके उन्होंने उर्दू उस उसका उसके उसे एक कर करके करते कवि कवियों ने का का वर्णन काव्य काव्य में किन्तु किया किये की कृष्ण के कारण के लिए के साथ केवल केशव को क्रिया है गयी जा जाता है जाने जिस जो तक तथा तो था थे दिया है दो दोनों द्वारा नहीं नायक नायिका के पति पर परंपरा पारसी पृ पेम प्रभाव प्रस्तुत प्राकृत प्राप्त प्रिय बन बने बिहारी भरत भारत भारतीय भारतीय साहित्य भाव भी मतिराम में में भी मेद यम यर यह यहीं या ये रस रहा रहे रीतिकाल में रीतिकालीन रूप में रूप से लेकर वाले वि विद्यापति विष्णु वे सं संस्कृत सभी समय समान साहित्य से स्थान हिन्दी के हिन्दी साहित्य ही हुआ हुई हुए है और है कि है की हैं हो होकर होता है होती होते होने

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