Sampuran Vaastushastra (सम्पूर्ण वास्तुशास्त्र)

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Diamond Pocket Books (P) Ltd., Jan 13, 2023 - Body, Mind & Spirit - 202 pages
सम्पूर्ण वास्तुशास्त्रा प्राचीन वास्तुकला को लेकर लिखी गई पहली पुस्तक है, जिसमें भवन-स्थापत्य कला पर विस्तृत चिंतन किया गया है। नए मकान का प्रवेश द्वार किधर हो? द्धारवेध किसे कहते हैं, कितने प्रकार के होते हैं? भवन में जल (Water-tank) स्थान कहां, किधर होना चाहिए? पाकशाला (Kitchen) में अग्नि स्थान (Fire-Spot) कहां हो? शयन कक्ष (Bed-Room) किस दिशा में होना चाहिए ताकि शयनकर्त्ता को भरपूर नींद आ सके। निवास करने योग्य भूखंड की आकृति कैसी होनी चाहिए। भू-परीक्षण के क्या-क्या शास्त्राीय विधन हैं? सही वास्तु के मुहूर्त कैसे देखे जाते हैं? इन सभी पहलुओं पर अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान लेखक डॉ. भोजराज द्विवेदी ने व्यावहारिक चित्रों के साथ पुस्तक को बहुत ही सुंदर ढंग से संवारा-संजोया है।
 

Selected pages

Contents

Section 1
11
Section 2
22
Section 3
65
Section 4
71
Section 5
78
Section 6
83
Section 7
88
Section 8
90
Section 10
95
Section 11
102
Section 12
103
Section 13
107
Section 14
164
Section 15
191
Section 16
193
Copyright

Section 9
91

Common terms and phrases

अग्नि अथवा अधिक अन्य अपने अशुभ आग्नेय आदि इस ईशान्य उत्तम उत्तर उस उसे ऊंची एक एवं ऐसा ऐसे और कक्ष कर करना चाहिए करने करें कहते हैं का का निर्माण कारण किया किसी की अपेक्षा की ओर कुछ के अनुसार के लिए के साथ को कोई कोण खाली स्थल गए गया है गृह के घर के घर में जल जाए तो जाता है जो ज्योतिष तक तथा दक्षिण दिशा के दिशा में दिशाओं दीवार दुकान दो दोनों द्वार न हो नक्षत्र नहीं निम्न ने नैऋत्य पर परंतु पश्चिम पूरब पूर्व प्रकार के प्रवेश प्राप्त फुट भवन भाग में भी भूखंड भूमि मकान मध्य मार्ग मुख्य यदि यह या रहे रूप वराहमिहिर वह वायव्य वाला वाले वास्तु वास्तुशास्त्र विष्णु विस्तार वृक्ष शनि शुभ सभी समय सूर्य से स्थल स्थान स्थिति स्वस्तिक हाथ ही हुआ है कि हो तो हों होंगे होकर होगा होगी होता है होती होना चाहिए होनी होने

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