Sutnipat Mulpali Tatha Hindi Anupat

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Motilal Banarsidass Publishe, 2003
(1) Index of quotations from the Pali texts,
 

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Contents

Section 1
2
Section 2
3
Section 3
54
Section 4
56
Section 5
57
Section 6
90
Section 7
102
Section 8
103
Section 14
208
Section 15
212
Section 16
214
Section 17
226
Section 18
230
Section 19
246
Section 20
254
Section 21
255

Section 9
142
Section 10
172
Section 11
204
Section 12
206
Section 13
207
Section 22
258
Section 23
272
Section 24
276
Section 25
282
Section 26
297

Common terms and phrases

१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ २६१ अथ खो अपने आप इति इस उत्तम उत्पन्न उस उसे एक एको एवं ऐसा कर करता है करते हैं करना करने कहते कहा का कि किया किसी की कुछ के कारण के लिए को कोई क्या गया है गौतम जन्म जाता है जान जानकर जाने जिस जो तं तथा तब तुम तृष्णा ते तो त्याग थे दिया दुःख दूसरे दृष्टि दे देता है धर्म नत्थि नहीं है ने पर पार पास प्रकार प्राप्त बहुत बात बुद्ध ब्राह्मण भगवन्तं भगवा भगवान् भगवान् ने भिक्षु भी मन मुझे मुनि मे में मैं यं यदि यह यहाँ या ये यो रहित लिया लोक लोके लोग वह वा वाला वाले वे व्यक्ति श्रमण संसार में सब सभी समय समाप्त साथ सुत्त से सो हि ही हुआ हुए हूँ हे है और हो होता है होति

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