Tamasā kī goda meṃ

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Vinīta Prakāśana - Poetry - 152 pages
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A poem, depicting scenes from Vālmīki's Rāmāyaṇa.

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अपना अपने अब आई आज आज्ञा आती आनन आनन्द आया इस एक और कभी कमल कर करती करते कर्म कल कहते कहा का काव्य कि की कुछ के कैसे कोमल क्या क्यों खडे गई गण गया गये गाते चम्पा चली जग में जगत जन जय जय जरा जा जाती जीवन जो तन तमसा तव तु तुम तो था थी थे देखा ध्वनि नयन नहीं नाम नित ने न्याय पथ पर पवन पादप पूर्ण फिर बन बात भी मधु मधुर मन मय मल मलय महा महि माता मुख मुझको मुझे मुनि में मेरा मेरे मैं यह यहाँ यही रही रहे राघव राम राम का रूप लक्ष्मण लख लखते लखन लगी लगे लता लिये ले लेकर लेकिन लोचन वन वह वही वारि वाल्मीकि विधि विपिन श्री सच सधन सब सभी साकेत सी सीता को सुना सुन्दर सुमन से सौन्दर्य ही हुई हुए है है हैं हो होता

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