Tantrāgamīya dharma-darśan

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Śaivabhāratī-Śodhapratishṭhānam, 2000 - Tantras - 1018 pages
Exhaustive study of the Tantric and Agamic literature.

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अथवा अदि अन्य अनेक अपनी अपने अब अभिनवगुप्त आगम आदि इन इनका इनके इनमें इस तरह से इसका इसकी इसके इसी उपलब्ध उस एक एवं ऐसा कर करते है करने कहा का का भी का स्वरूप किन्तु किया गया है किया है की कुछ के अनुसार के नाम से के रूप में के लिये के साथ को गई है गया है कि गुरु चर्चा जाता है जाती जैसे जो तत्व तथा तीन तो दर्शन द्वारा दिया नहीं नहीं है नामक ने पकी पद पर परिचय प्रकाशित प्रमाण पाशुपत बताया गया है भेद मत मन मल मानी माया मिलता है मिलती मृ में भी मोक्ष यह यहाँ ये वचन वह वहीं वाले विविध विषय विष्णु वे वैष्णव शक्ति शब्द शाक्त शिव सभी समय स्थिति स्पष्ट स्वरूप सृष्टि हम ही हुआ हुए है और हैं हो जाता है होता है होती होने

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