Unīnde kī lorī

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Rādhākr̥shṇa, 1985 - 72 pages

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Contents

बलात्कार
51
रेगिस्तान
57
तुम
66

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Common terms and phrases

अगर अचानक अपनी अपने अब असम अंत आकाश आज मैंने आदमी आधी रात आप आयी इस इसी उनींदे की लोरी उस उसके उसी उसे और कब कभी कर करते कल क्या का कि किसने किसी कुछ के के साथ को कोई कौडी एक गया गयी गये घने चाय जब जहाँ जा जाता है जाती जाना जो ठोस तक तब भी तरह तुम तुम्हारे तो था थी थे दिन दिल दिल्ली दूर देखा देखो देंगे नयी नहीं है पर पहले पानी पास पु पुल पेड़ फर्क करो फिर फूल बहुत बाद बारिश भर भी भी नहीं मगर मरे मुझे मेरी मेरे में फर्क मैं मौत यह या यात्रा ये रह रहा है रही रहीं रंग लिए ले लेकिन वह वही वहीं वे वे तुम्हें शराब शहर सकते सब सुबह सूरज से हम हर हवा हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ हैं हो होगा होगा तो होता है

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