Yog Bhagaye Rog (Pb)

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Prabhat Prakashan, Jan 1, 2009 - 160 pages
Get healthy through yoga.

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योग की ये किताबे पढ़ना टाइम खराब करना है क्योकि हर आदमी की शारीरिक रचना शरीर की स्थिति अलग अलग होती है जो रोग का इतिहास और रोगी का स्वभाव उसके रोग की स्थिति देखकर योग और प्राणायाम कराता है | न की किताब में देखकर कुछ भी कराने लग जाए | सही जानकारी करे फिर प्रामाणिक डिग्री धारी डॉक्टर से मिलकर ही योगा ध्यान आदि योगिक क्रियाएं करे | 

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one of the best book, i have read.
very simple book to get started with the yogic asanas.
u can achive wonderful health and a feeling of Ecstasy by practising the asana and meditation given in this book.

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