Zindā muhāvare

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Vāṇī Prakāśana, 1993 - Hindi fiction - 137 pages
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Based on the partition of India and creation of Pakistan on the independence of India in 1947.

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अख़्तर अपना अपनी अपने अब अब्बा अभी अम्मां आए आखिर आगे आज आप आया इमाम इस उठा उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक और कभी कर कराची कह कहां का कि किया किसी की तरह कुछ के बाद के लिए के साथ को कोई क्या गई गए गया था गांव गोलू घर घर में चचा जब जा जाता जाने जैसे जो तक तरफ तुम तो था कि थी थीं थे दिन दिया दिल देख देखा दो दोनों नहीं नाम निज़ाम ने ने कहा पर पहले पाकिस्तान पास फिर बहुत बात बार बाहर बीच बेटे बैठ भर भाई भी मगर मा मां मुंह में मैं यह यहां रह रहा था रहा है रही थी रहीमउद्दीन रहे लगा लच्छू लोग वह वहां वाले शमीमा शादी सब सबीहा सबीहा ने सामने से हम हर हां हाथ ही हुआ हुई हुए हूं है हैं हो हो गया होगा

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