Gaṇitānuyoga: Jaina Āgamamata bhūgola-khagola evaṃ antariksha sambandhī sāmagrī kā vishayakrama se prāmāṇika saṅkalana

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Āgama Anuyoga Ṭrasṭa, 1986 - Astronomy, Ancient

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१० अथवा अनेक अन्तर अपेक्षा आठ आदि इन इस प्रकार इसी उ० १ उ० गोयमा उत्तर उस एक एवं ओर कर करता करते हैं करने कहा गया है कही गई कहे गये हैं का काल कितने किया की कुछ के ऊपर के समान के स्थान को क्षेत्र गं गई है गणित चन्द्र चार चेव जम्बूद्वीप जाव जैन जो णं भंते तक तथा तीन दक्षिण दिशा देव देवों दो द्वारा द्वीप नक्षत्र नरकावास नामक नीचे प० पण्णत्ता पर परिधि पर्वत पूर्व पृ० पृथ्वी के प्र० प्रकार के प्रथम प्रदेश प्रमाण प्राप्त भाग भाग में भी मण्डल मुहूर्त में यथा यह यहाँ या यावत् ये रत्नप्रभा रहते हैं रूप लाख लोक वर्ण वह वहाँ वा वाले वि वे शेष श्री संख्या सु० सूत्र सूर्य से सौ हजार योजन ही हुआ हुई हुए हे भगवन् हेतु है और हो होता है होती होते हैं

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