Mahadevi

Front Cover
Rajkamal Prakashan, Jan 1, 2009 - 443 pages
यह किताब महादेवी की लिखत-पढ़त, उनके चित्रों-रेखांकनों, उनके जीवन-वृत्त और उनके बारे में लेखक की संस्कृतियों के भीतर से उनको. समझने की एक निजी कोशिश है । लेखक की निजी संस्मृतियाँ भी महादेवी के कर्तृत्व को व्याख्यायित करने और उसके सारतत्त्व तक पहुँचने की बुनियाद के बतौर हैं । महादेवी का संसार जितना अन्तरंग है, उतना ही बहिरंग । अन्तरंग में दीपक की खोज है और बहिरंग के कुरूप-काले संसार में सूरज की एक किरण की । महादेवी के सम्पूर्ण कृतित्व में अद्भुत संघर्ष है और पराजय कहीं नहीं । इस किताब का हर शीर्षक एक नया अध्याय है और इसका शिल्प .आलोचना के क्षेत्र में एक नयी सूझ । साहित्य की अन्य विधाओं की तरह ही आलोचना की पठनीयता भी जरूरी है । दरअसल किसी कविता, कला, कथा, विचार या लेखक के प्रति सहज उत्सुकता जगाना और उसे समझने का मार्ग प्रशस्त करना ही आलोचना का उद्देश्य है । और यह किताब यही काम करती है। महादेवी के रचनात्मक विवेक को जानने के लिए यह किताब एक समानान्तर रूपक की तरह है। उनकी कविता, गद्य और उनकी चित्र-वीथी - तीनों मिलकर ही महादेवी के सौन्दर्यशास्त्र का चेहरा निर्मित करते हैं । यह किताब इसी चेहरे का दर्शन-दिग्दर्शन है ।
 

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6
Section 7
Section 8
Section 15
Section 16
Section 17
Section 18
Section 19
Section 20
Section 21
Section 22

Section 9
Section 10
Section 11
Section 12
Section 13
Section 14
Section 23
Section 24
Section 25
Section 26
Section 27
Section 28

Common terms and phrases

About the author (2009)

दूधनाथ सिंह

जन्म : 17 अक्टूबर, 1936, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव सोबंथा में !

शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी साहित्य), इलाहबाद विश्वविद्यालय !

जीविका : कुछ दिनों (1960-62) तक कलकत्ता में अध्यापन ! फिर इलाहबाद विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग में ! अब सेवानिवृत !

लेखन : सन 1960 के आसपास से !

कृतियाँ : आखिरी कलाम, निष्कासन, नमो अन्धकार (उपन्यास); सपाट चहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, तू फू (कहानी-संग्रह); कथा समग्र (सम्पूर्ण कहानियां); यम्गाथा (नाटक); अपनी शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू (कविता-संग्रह); सुरंग से लौटते हुए (लम्बी कविता); निराला : आत्महंता आस्था (निराला की कविताओं पर एक सम्पूर्ण किताब); लौट आ, ओ धर! (संस्मरणात्मक मुक्त गद्य); कहा-सुनी (साक्षात्कार और आलोचना); महादेवी (महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं पर एक किताब) !

 

 

Bibliographic information