Bharat Mein Vigyan Aur Takneeki Pragati

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Rajkamal Prakashan Pvt Ltd, Sep 1, 2003 - 191 pages
पाश्चात्य विद्वान ऐसा बताते रहे हैं कि विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी पाश्चात्य वस्तु है । इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत यह ग्रीस में शुरू हुई और कुछ समय बाद पुन: यूरोप में प्रकट हुई, तब से जो उन्नति हुई वह मानव इतिहास में अद्वितीय है । उनके अनुसार, इस उन्नति से बाकी विश्व को लाभ हुआ है । वह आगे बताते हैं कि इस समय यूरोप इस ज्ञान को उन देशों में प्रसारित कर रहा है जिनमें इसे जज्ब करने की क्षमता है । लेकिन आज हमें जो ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, वह इसके विरुद्ध हैं । इतिहास पर एक सरसरी नज़र दौड़ाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी भारतीय संस्कृति के अंश और उसकी सभ्यता का आधार रहे हैं । अपने इतिहास के हर काल में भारतीयों ने विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उल्लेखनीय योगदान दिया । यह ज्ञान पूर्णत% उपलब्ध था और विश्व के भिन्न भागों में और भिन्न संस्कृतियों में फैला । पूर्व में चीन और इंडोनेशिया, पश्चिमी एशिया, केन्द्रीय एशिया और यूरोप ने भारत से जो कुछ ग्रहण किया, उससे पर्याप्त लाभ उठाया । अन्धकार युग में और 12वीं से 18वीं सदी के सात सौ वर्षों की अवधि में भारत में संस्कृत, अरबी और फारसी में विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी पर दस हजार ग्रन्थ लिखे गए । यह फेहरिस्त अन्तिम नहीं है । इसके अलावा इन भाषाओं और अन्य भारतीय भाषाओं में अनेक ग्रन्थ थे । इसलिए जो अब किया जा रहा है वह उसी परम्परा का पुनरुद्धार है जिसे औपनिवेशिक राज में भंग कर दिया गया था । आजादी के पिछले 54 सालों ने देश को, जो कभी सिर्फ यूरोप को कच्चा माल देता था, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति के रूप में रूपांतरित किया है । भारत आणविक, अन्तरिक्ष, सागरीय और अटलांटिक क्लब में प्रवेश कर चुका है । विज्ञान के विख्यात अध्येता ए– रहमान की यह पुस्तक स्वतंत्र भारत में विज्ञान और तकनीकी प्रगति के विभिन्न आयामों को रेखांकित करती हुई हमें इस प्रगति का एक सम्पूर्ण तथ्यात्मक विवरण उपलब्ध कराती है ।
 

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अंत अधिक अनुसंधान अनुसन्धान अनुसन्धान और विकास अनेक अन्तरिक्ष अन्य अपने अलावा अहमदाबाद इंडियन इन इस इसका इसके इसमें उत्पादन उद्योग उद्योगों उन उन्हें उपयोग उपलब्ध एई एक एशिया औद्योगिक कर करता है करती करना करने के लिए कलकत्ता का काजोल कारपोरेशन कार्य कि की कुल कृषि के क्षेत्र में के लिए केन्दीय केन्द्र को क्रिया गया क्षमता क्षेत्रों गई गए गया है गुजरात जा जाता जैसे जो टेबनोलत्जी तक तकनीकी तथा तो था थी थे दिल्ली देश देशों दो द्वारा नई नई दिल्ली नहीं नियन्त्रण निर्माण नीति ने नेशनल पर परिषद प्रयोग प्रशिक्षण बनाने बने बाद भारत भारतीय भी मुख्य यह या योजना रहा है रहे राज राजस्थान रिसर्च रूप रोड लि लिमिटेड विकसित विकास के विज्ञान एवं विद्वान विभाग विभिन्न विशिष्ट विश्वविद्यालय वैज्ञानिक वैज्ञानिकों शिक्षा शोध संगठन संस्थाओं संस्थान समय समिति सरकार सहयोग सहायता साइंस से सोसायटी स्तर स्थापित हरियाणा ही हुआ हुई हुए है और हैं हो

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