Pātaņjala Yoga darśana: Samyagdarśinī Hindī vyākhyā sahita

Front Cover
Yoga Niketana Ṭrasṭa, 1999 - Yoga - 251 pages
0 Reviews
Treatise, with Samyagdarśinī Hindi commentary, on Yoga philosophy.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
33
Section 2
34
Section 3
35

10 other sections not shown

Common terms and phrases

अत अनादि अपने अर्थ अर्थात् अव अवस्था इन इसका इसलिये इसी ईश्वर उत्पन्न उन उस उसका उसके उसी उसे एक ऐसा कर करके करते करना करने करने से कर्म कल कहते हैं कहा जाता कहा है क्योंकि का किन्तु किया किसी की के कारण के द्वारा के नाम के लिये केवल को को प्राप्त कोई गया जव जा जाती जाना जिस जैसे जो तक तथा तमोगुण तव तवा तात्पर्य तो दर्शन दोनों धर्म ध्यान नहीं है नहीं होता निरोध ने पतंजलि पर परन्तु परमेश्वर परिणाम प्राण पुरुष फल फिर भी में में भी मोक्ष यक्ष यदि यह है कि यही यहीं या ये योग योगी रजोगुण रहता है रहित वन वह व्याख्या वाले वित विल विल के विषय वे शब्द शरीर सकता है समस्त समाधि सव स्थिति स्वरूप सिद्धि सुख ही ही है हुआ हुए है और हो जाता है होकर होता है होती होते होना होने होने से

Bibliographic information