Bihārī kī kāvyabhāshā

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Sāhitya Ratnālaya, 1990 - Hindi poetry - 138 pages

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अथवा अधिक अपनी अपने अभिव्यक्ति अर्थात् अलंकार अवधी आदि इस इस दोहे इस प्रकार इसके इसमें इसलिए उस उसकी उसके उसी एक ओर कया कर करके करती है करते करना करने कवि कहते हैं कहा का अर्थ का प्रयोग काव्य में काव्यभाषा किया है किसी कुछ के कारण के रूप में के लिए कै को क्रिया गई गया है चित्र जब जा जाता है जाती जिस जैसे जो टीका में इसका तक तथ तथा तब तो था दिया दोनों दोहा दोहे में नहीं नायिका के पर प्रस्तुत बात बिम्ब बिहारी की बिहारी ने बिहारी रत्नाकर ब्रजभाषा भाव भावना भावों भी मन में इसका अर्थ में प्रयुक्त यह यहाँ या रंग रहा है रूपों लाल लिया वर्णन वह वाक्य शब्द का शब्दों श्रृंगार श्लेष संस्कृत सब समय सम्बन्ध सामान्य सूरदास से स्पष्ट हम ही हुआ है हुई हुए हृदय है और है कि है है हैं हो होकर होता है होती होने

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