Hiranī, Biranī kā gīta aura aherī Rājā kā kissā

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Ṭhākuraprasāda, 1970 - Hindu legends - 64 pages
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अपनी अपने अब अहेरी कुमार इतना इन्द्र इस उनके उस उसके ए दइबा ए राम एक ऐसा ओर और कर कहकर कहने लगा कहा कहा कि का कि किया की कुछ के के लिये केि को कोई क्या गये गुजरात घर घोड़ा चला चारों छपरा जब जाकर जी जो तक तब तरफ तुम तुम्हारे तुम्हें तो था थी थे दिन दिया दूर दे देखकर देखा दोनों धिरिजवा रे ना नटिनी नहीं नाहीं नीचे ने कहा पर पास पीसन सिंह पेड़ प्यारे बचनवाँ रे बचनवां रे ना बड़ा बड़े बलकी कुमारी बहुत बाद बिरनी भइंसवा रे ना भइले भी मनमें महादेव माता मुझे में मोर मोहना यह रहे राजकुमार राजा राजाने रानी राम रामा रामा रामा रे दइबा लगी लगे ले लेकर वह वहाँ वाराणसी श्राप सब सवा रे ना सात साथ सुग्गा सुन सुन्दर से सो हम हिरनी ही हुआ हूँ हे है हैं हो गया होकर

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