Saptaparna

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Lokbharti Prakashan, Sep 1, 2008 - 212 pages
 

Contents

Section 1
4
Section 2
8
Section 3
44
Section 4
74
Section 5
79
Section 6
83
Section 7
95
Section 8
119
Section 10
142
Section 11
166
Section 12
173
Section 13
177
Section 14
181
Section 15
191
Section 16
201
Section 17
209

Section 9
127

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Common terms and phrases

अतः अथर्ववेद अधिक अनेक अन्य अपनी अपने अब अश्वघोष आज आदि इस उनकी उनके उस उसका उसकी उसके उसी उसे ऋग्वेद एक ऐसी ओर कथा कभी कर करके करता है करती करने कवि का कालिदास काव्य किन्तु किया किसी की कुछ के कारण के प्रति के लिए के समान के साथ को कोई गया जब जयदेव जल जिस जिसके जीवन के जैसे जो ज्यों तक तथा तब तुम तो था थी थे दिया दे देख देता धरती धर्म नहीं नूतन ने पथ पर परन्तु पृथ्वी प्रकार प्रकृति प्रथम प्राप्त भवभूति भाषा भी मनुष्य महाभारत मानव मानो में में भी मेरे मैं यह या रचना रहा रही रहे राम रामायण रूप में वह वही वाले विविध विशेष वे वेद शकुन्तला शान्त संस्कृत सत्य सब समय सम्भव साहित्य सीता से सौन्दर्य स्थिति हम हमें हित ही हुआ हुई हुए हृदय है और है कि हैं हों होकर होता है होती होने

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