Jaina Tamila sāhitya aura Tirukkurala

Front Cover
Samyagjñāna Pracāraka Maṇḍala, 1987 - Jaina literature, Tamil - 84 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

5 other sections not shown

Other editions - View all

Common terms and phrases

अध्याय अनेक अन्य अपना अपनी अपने अर्थ अर्थात अहिंसा आज आदर्श आदि इस इस प्रकार इसमें ईसा उनका उनकी उनके उन्होंने उस उसकी उसके उसने एक ऐसा ऐसे कभी कर करके करता है करना करने कर्म कवि कहते हैं कहा का काल काव्य किया किया है किसी की कु कुछ के लिए के साथ को कोई क्या गई गया है गये ग्रन्थ चाहिए चिंतामणि चेर जब जाता है जाती जिस जीव जीवक जीवन जैन धर्म जो तक तमिल तमिल भाषा तमिलनाडु तिरु तो था थी थे दिया दो दोनों द्वारा धर्म का नहीं नहीं है नाम ने पर पालन पूर्व पृ प्रथम प्राप्त प्रेम भारत भाषा भी मदुरै मन में में ही यथा यदि यह या राजा लोक वह वासुकी वे शताब्दी श्रमण श्री सब समय साहित्य से ही हुआ है और है कि है जो है है हो होता है होती होते

Bibliographic information