Aakash Darshan

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Rajkamal Prakashan, Sep 1, 2003 - 376 pages
धरती का मानव हजारों सालों से आकाश के टिमटिमाते दीपों को निहारता आया है। सभी के मन में सवाल उठते हैं - आकाश में कितने तारे हैं ? पृथ्वी से कितनी दूर हैं ? कितने बड़े हैं ? किन पदार्थों से बने हैं ? ये सतत क्यों चमकते रहते हैं ? तारों के बारे में इन सवालों के उत्तर आधुनिक काल में, प्रमुख रूप से 1920 ई. के बाद, खोजे गए हैं; इसलिए भारतीय भाषाओं में सहज उपलब्ध भी नहीं हैं। प्रख्यात विज्ञान-लेखक गुणाकर मुले ने इस भारी अभाव की पूर्ति के लिए ही प्रस्तुत गं्रथ की रचना की है। आधुनिक खगोल-विज्ञान में आकाश के सभी तारों को 88 तारामंडलों में बाँटा गया है। गुणाकर मुले ने हर महीने आकाश में दिखाई देनेवाले दो-तीन प्रमुख तारामंडलों का परिचय दिया है। साथ में तारों की स्पष्ट रूप से पहचान के लिए भरपूर स्थितिचित्र भी दिए हैं। बीच-बीच में स्वतंत्र लेखों में आधुनिक खगोल-विज्ञान से संबंधित विषयों की जानकारी है, जैसे, आकाशगंगा, रेडियो- खगोल-विज्ञान, सुपरनोवा, विश्व की उत्पत्ति, तारों की दूरियों का मापन, आदि। तारामंडलों के परिचय के अंतर्गत सर्वप्रथम इनसे संबंधित यूनानी और भारतीय आख्यानों की जानकारी है। उसके बाद तारों की दूरियों और उनकी भौतिक स्थितियों के बारे में वैज्ञानिक सूचनाएँ हैं। ग्रंथ में तारों से संबंधित कुछ उपयोगी परिशिष्ट और तालिकाएँ भी हैं। अंत में तारों की हिंदी-अंग्रेजी नामावली और शब्दानुक्रमणिका है। संक्षेप में कहें तो आकाश-दर्शन एक ओर हमें धरती और इस पर विद्यमान मानव-जीवन की परम लघुता का आभास कराता है, तो दूसरी ओर विश्व की अति-दूरस्थ सीमाओं का अन्वेषण करनेवाली मानव-बुद्धि की अपूर्व क्षमताओं का भी परिचय कराता है। आकाश दर्शन वस्तुतः विश्व-दर्शन है।
 

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Awesome Book..you will get all possible information of stars constellation in this book.

Selected pages

Contents

Section 1
10
Section 2
18
Section 3
21
Section 4
22
Section 5
25
Section 6
39
Section 7
44
Section 8
46
Section 15
100
Section 16
127
Section 17
136
Section 18
142
Section 19
175
Section 20
193
Section 21
205
Section 22
217

Section 9
56
Section 10
60
Section 11
66
Section 12
74
Section 13
91
Section 14
95
Section 23
244
Section 24
258
Section 25
288
Section 26
293
Section 27
316

Common terms and phrases

अधिक अपने अर्थ अल्फा आकाश के आकाश में आकाशगंगा आज इन इस इस मंडल इसलिए इसे उत्तर उस ऊर्जा एक ऐसे कई कर करते करने करीब कांतिमान काफी काल किया की एक की ओर कुछ के बारे में के रूप में के लिए को कोई क्रांतिवृत्त खगोल खगोलविद खोज गए गया है जा सकता है जाता है जानकारी जुड़वां जो ज्योतिष तक तथा तब तरह तारा है तारा-गुच्छ तारे का तारों की तो था थी थे दक्षिण दिया दूरी देवयानी दो नक्षत्र नक्षत्रों नजदीक नहीं नाम नीहारिका ने पता पर पश्चिम पहचाना पहले पाश्चात्य पूर्व पृथ्वी प्रकार प्रकाश-वर्ष दूर है प्रमुख प्राचीन बाद बीटा भारतीय भी मंडल के मगर में है यह या यूनानी रहा है रहे लगभग वस्तुतः वह विश्व वृश्चिक वे शब्द सबसे समय साल सिंह सूर्य से से भी स्थान हम हमसे करीब ही हुआ हुए है और है कि हैं हो होता है

About the author (2003)

जन्म : विदर्भ के अमरावती जिले के सिंदी बुजरूक गांव में, 3 जनवरी, 1935 को। आरंभिक पढ़ाई गांव के मराठी माध्यम के स्कूल में। स्नातक और स्नातकोत्तर (गणित) अध्ययन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। आरंभ से ही स्वतंत्र लेखन। विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरातत्व, पुरालिपिशास्त्र, मुद्राशास्त्र और भारतीय इतिहास व संस्कृति से संबंधित विषयों पर करीब 35 मौलिक पुस्तकें और 3000 से ऊपर लेख हिंदी में और लगभग 250 लेख अंग्रेजी में प्रकाशित। विज्ञान, इतिहास और दर्शन से संबंधित दर्जन-भर ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (नई दिल्ली) द्वारा अध्यापकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण-शिविरों में लगभग एक दशक तक वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान देते रहे। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (नई दिल्ली) द्वारा प्रदत्त सीनियर फैलोशिप के अंतर्गत 'भारतीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इतिहास’ से संबंधित साहित्य का अध्ययन-अनुशीलन। विज्ञान प्रसार (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) के दो साल फेलो रहे। प्रमुख कृतियां : अक्षर-कथा, भारत : इतिहास और संस्कृति, आकाश-दर्शन, संसार के महान गणितज्ञ, तारों भरा आकाश, भारतीय इतिहास में विज्ञान, नक्षत्र-लोक, अंतरिक्ष-यात्र, सौरमंडल, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, महाराष्ट्र के दुर्ग, गणितज्ञ-ज्योतिषी आर्यभट, भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, भारतीय लिपियों की कहानी, भारतीय विज्ञान की कहानी, भारतीय सिक्कों का इतिहास, भास्कराचार्य, कंप्यूटर क्या है, कैसी होगी इक्कीसवीं सदी, खंडहर बोलते हैं, बीसवीं सदी में भौतिक विज्ञान, कृषि-कथा, महान वैज्ञानिक महिलाएं, प्राचीन भारत में विज्ञान, भारत के प्रसिद्ध किले, हमारी प्रमुख राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, गणित की पहेलियां, भारत : इतिहास, संस्कृति और विज्ञान आदि। पुरस्कार-सम्मान : हिंदी अकादमी (दिल्ली) का साहित्य सम्मान पुरस्कार। केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) का आत्माराम पुरस्कार। बिहार सरकार के राजभाषा विभाग का जननायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार। मराठी विज्ञान परिषद् (मुंबई) द्वारा श्रेष्ठ विज्ञान-लेखन के लिए सम्मानित। 'आकाश-दर्शन’ व 'संसार के महान गणितज्ञ’ ग्रंथों के लिए प्रथम मेघनाद साहा पुरस्कार। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् (NCSTC) का राष्ट्रीय पुरस्कार। निधन : 16 अक्टूबर, 2009

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