Alokapu˝ja Svāmī Svatantrānanda

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Citrasena Prakāśana Saṃsthāna - Hindus - 144 pages
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Contributed articles on the life and works of Swami Svatantrānanda, 1918-1993, Hindu religious leader.

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अपनी अपने अवस्था आग्रह आत्मा आदि आनन्द आप आये इस प्रकार उनकी उनके उन्होंने उपस्थित उस समय एक बार एवं और कर करता करने कहते का किया किसी की कुछ कृष्ण के कारण के लिए को कोई क्या क्योंकि गई गया है गोरखपुर जनकपुर जब जी ने जी महाराज के जो तक तथा तब तुम तो था था है थी थे है दर्शन दिन दिया देखकर द्वारा नहीं है ने कहा कि पर परन्तु परम परमात्मा पास पूज्य पूज्यपाद प्रवचन प्रवचन में फिर बहुत बाद भक्ति भगवान भी महात्मा मुझे में में श्री में ही मेरे मैं यह ये रहते रहे हैं राम रूप लगे लोग लोगों वह वहाँ विशेष वृन्दावन वे शरीर श्री स्वामी जी सन्त सब सभी समस्त सिंह से स्थान स्थिति स्वरूप स्वामी जी के स्वामी जी महाराज ही हुआ हुआ है हुई है इस है कि है श्री है है हैं हो गये होकर होने

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