Gunāhoṃ kā devatā

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Bhāratīya Jānapīṭha, 1960 - 381 pages
27 Reviews

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It is an emotional love story with a twist. - Goodreads
The portrayal of characters is beautiful. - Goodreads
It is a very unconventional love story. - Goodreads

Review: गुनाहों का देवता / Gunahon Ka Devta

User Review  - Kumam - Goodreads

a fantastic lover story with a bitter ending, set in 1940's Allahabad, the novel is a bit long but a gripping tale about love, lust and relationships. extremely endearing yet culpable characters that ... Read full review

Review: गुनाहों का देवता / Gunahon Ka Devta

User Review  - Mani Kant - Goodreads

I was proved wrong; "Gunahon Ka Devta" is not a crime novel, on the contrary, it is about more tender feelings and kinder characters. It is the story of love and sacrifice, societal norms and self ... Read full review

Common terms and phrases

अगर अच्छा अपना अपनी अपने अब अभी आई आज आप आया आये इतना इतनी इस उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक ओर और कभी कर करती कहा कहीं कि किया की कुछ कोई क्या क्यों गई गये चन्दर चन्दरने चली चाय चुपचाप जब जा जाती जाने जैसे जो ठीक डाक्टर तक तब तरह तुम तुमने तुम्हारे तुम्हें तो था कि थी थीं थे दिन दिया दी दे देखा देर दो नहीं नहीं है पम्मी पहले पास पूछा प्यार फिर बहुत बात बाद बिनती बिनतीने बैठ बोला बोली भी भी नहीं मत मन मनमें मालूम मुझे मेरे मैं मैंने यह यहाँ या ये रहा था रही रहीं थी रहे रा लगता लगा लगी लड़की लिए लिया ली ले लेकिन वह सब साथ साहब सुधा सुधाने हम हाँ हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं हो गई हो गया होगा होता

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