Gunāhoṃ kā devatā

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Bhāratīya Jñānapīṭha, 1960 - 381 pages
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Review: गुनाहों का देवता / Gunahon Ka Devta

User Review  - Goodreads

The book is very high on emotions but all female characters are portrayed as if their existence is solely for the benefit of males. May be this is true of the time when book was written(I think around ... Read full review

Review: गुनाहों का देवता / Gunahon Ka Devta

User Review  - Deepak Pitaliya - Goodreads

The book is very high on emotions but all female characters are portrayed as if their existence is solely for the benefit of males. May be this is true of the time when book was written(I think around ... Read full review

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Common terms and phrases

अगर अच्छा अपना अपनी अपने अब अभी आई आज आप आया आये इतना इतनी इस उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक ओर और कभी कर करती कहा कहीं कि किया की कुछ कोई क्या क्यों गई गये चन्दर चन्दरने चली चाय चुपचाप जब जा जाती जाने जैसे जो ठीक डाक्टर तक तब तरह तुम तुमने तुम्हारे तुम्हें तो था कि थी थीं थे दिन दिया दी दे देखा देर दो नहीं नहीं है पम्मी पहले पास पूछा प्यार फिर बहुत बात बाद बिनती बिनतीने बैठ बोला बोली भी भी नहीं मत मन मनमें मालूम मुझे मेरे मैं मैंने यह यहाँ या ये रहा था रही रहीं थी रहे रा लगता लगा लगी लड़की लिए लिया ली ले लेकिन वह सब साथ साहब सुधा सुधाने हम हाँ हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं हो गई हो गया होगा होता

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