Swami Dayanand Saraswati

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Prabhat Prakashan, Jan 1, 1971 - Hindus - 60 pages
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आधुनिक भारत के महान् चिंतक, समाज-सुधारक व देशभक्त दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को टंकारा में जिला राजकोट, गुजरात में हुआ था। उनके पिता का नाम करशनजी लालजी तिवारी और माँ का नाम यशोदाबाई था। उनके पिता एक कर-कलेक्टर होने के साथ एक अमीर, समृद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति थे। दयानंद सरस्वती का असली नाम मूलशंकर था और उनका प्रारंभिक जीवन बहुत आराम से बीता।

महर्षि दयानंद के हृदय में आदर्शवाद की उच्च भावना, यथार्थवादी मार्ग अपनाने की सहज प्रवृत्ति, मातृभूमि की नियति को नई दिशा देने का अदम्य उत्साह, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक दृष्टि से युगानुकूल चिंतन करने की तीव्र इच्छा तथा आर्यावर्तीय (भारतीय) जनता में गौरवमय अतीत के प्रति निष्ठा जगाने की भावना थी। उन्होंने किसी के विरोध तथा निंदा करने की परवाह किए बिना आर्यावर्त (भारत) के हिंदू समाज का कायाकल्प करना अपना ध्येय लिया था।

महर्षि दयानंद ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1932 को गिरगाँव बंबई में आर्यसमाज की स्थापना की। अपने महाग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में स्वामीजी ने सभी मतों में व्याप्त बुराइयों का खंडन किया है। स्वामी दयानंद के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने 1886 में लाहौर में ‘दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज’ की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानंद हरिद्वार के निकट काँगड़ी में गुरुकुल की स्थापना की।

 

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Selected pages

Contents

प्रारंभिक जीवन
21
नवजागरण का सूत्रपात
36
वैदिक पाठशालाओं की स्थापना
50
11
73
स्वामी दयानंद का साहित्य
87
वेदभाष्य
107

Common terms and phrases

अजमेर अनेक अन्य अपनी अपने अब अर्थात् आए आदि आर्य समाज इस प्रकार ईश्वर उनकी उनके उन्हें उन्होंने उपासना उस उसके उसने उसे एक एवं और कर करते करना करने का का कारण कार्य काशी किया किया है किसी की कुछ के लिए के विषय में के साथ को कोई क्या गई गए गुरु ग्रंथों चाहिए जब जयपुर जा जाए जाने जो ज्ञान तक तथा तो था थी थे दर्शन दिए दिन दिया दी देश द्वारा धर्म नहीं नाम पंडित पर परंतु परमेश्वर पहुँचे पास प्राप्त फिर बंबई ब्रह्मचारी भारत भी मन मनुष्य में मैं मोक्ष यदि यह यात्रा रहा रहे राजा रूप लगा लगे लिखा है लोगों वह वहाँ विचार वे वेद वेदांत वेदों वैदिक व्याख्यान शास्त्रार्थ सं सकता सत्य सब सभी समय से स्वामीजी स्थान स्वामी दयानंद ने स्वामीजी ने हरिद्वार हिंदी ही हुआ हुई हुए हूँ हेतु है है कि हैं हो होता है होते होने

About the author (1971)

जन्म : 26 अगस्त, 1965 आगरा (उ.प्र.)। शिक्षा : स्नातकोत्तर, डी.जे., पी.जी.डी. (ड्रामा एंड स्टेज)। लगभग पाँच सौ शैक्षिक पुस्तकें, उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यक्तित्व विकास एवं सामान्य अभिरुचि आदि विषयों पर एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेख, फीचर, कविताएँ, कहानियाँ, लेख नाट्य लेखन। रेडियो, टेलीविजन, फिल्म की विविध विधाओं हेतु लेखन। आकाशवाणी से कहानियाँ, वार्ताएँ, परिचर्चाएँ प्रसारित। संप्रति : चीफ एडीटर, रायसंस पब्लिशिंग हाउस प्रा. लि., दिल्ली।

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