Vedavyākhyā-grantha: pt. 1. Yajurveda-vyākhyā, mādhyandina-yajurvedasaṃhitā, adhyāya 1-10

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Veda-Saṃsthāna, 1977 - Religion
Interpretation of the Vedas, Hindu canonical texts.

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अग्नि अथवा अपनी अपने असि आत्मा इन्द्र इस इसी उस उसका उसकी उसके उसी उसे एक कर करके करता है करती करते करना करने करनेवाला करे कर्म कहते हैं का अर्थ है का प्रयोग का है किया की के प्रति के लिये के साथ को गया है गुह चाहिये जन जब जा जाता है जिस जीवन जीवनी जो तथा तब तु तुझ तुझे तुम तू ते तेरा तेरी तेरे तो त्वा दिव्य देव देवयाजक दो दोनों द्वारा ने पति पत्नी पर पृथिवी प्रकार प्रत्येक प्राण प्राप्त भावना भी मन मा मुझे में मेरे मैं यह यहां रक्षा रह रहता है रहा रहे वह वा विष्णु वे वेद शब्द का शरीर शिव शुद्ध संसार सदा सब सविता साधक साधना सूर्य से से युक्त सोम स्वाहा हम ही हुआ है हुए हूँ है और है कि है है हो होकर होता है होती होने से

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