Mānasaśabdārthatattva

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Vij˝ānabhāratī, 1971 - 145 pages

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अत अपने अब अयो० अयोध्या अयोध्याकाण्ड अर० अर्थ है अर्थात् अर्थों अवधी आदि आया इसका इसी उक्त उत्तर० उस उसे एकवचन कर करके कहते हैं कहा कारक कालिदास किन्तु की कुछ के अर्थ में के रूप में के लिए के साथ को क्रिया क्रियापद गया है जब जा जाता है जाती जी जैसे तथा तब तुलसी ने तुलसी लिखते हैं तुलसीदास तो था दिया दो द्वारा नहीं नाम ने भी पद पर पाठक पाणिनि प्र प्रचलित प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है प्राकृत फिर बहुत बाल० बालकाण्ड बाला भाषा मन मानस में भी यह यहाँ या राम रामचरितमानस रावण लक्ष्मण लिखा है लेकिन वह विकसित विभक्ति विशेष विशेषण वे शब्द का प्रयोग शब्द है सं० संज्ञा संस्कृत संस्कृत में सकता है सब सीता सूरसागर से हिन्दी भाषा हिन्दी में ही हुई हेमचन्द्र है और है कि है है हो गया होता है होती

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