Hinduoṃ ke vrata, parva aura tyauhāra: hindūoṃ ke sampūrṇa vratoṃ, parvoṃ aura tyauhāroṃ kī śāstrīya vidhi, māhātmya tathā paurāṇika evaṃ loka-kathāem̐

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Loka-Bhāratī Prakāśana, 1966 - Fasts and feasts - 423 pages

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अथवा अनेक अपनी अपने अमावस्या आहि इन इस इस प्रकार है इसका इसी उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसने उसी उसे एक बार एकादशी एवं और कर करके करते हैं करना करने का करे कहा क्या का कि किन्तु किया किसी की कुछ के दिन के लिए के साथ को कोई गई गए गया है घर चाहिए चाहिये जब जा जाती जाने जी जो तक तथा तब तुम तो था थी थे दान दिनों दिया दी दीपावली दोनों नहीं नाम ने पति पर परम प्रार्थना पार्वती पुत्र पूजन पूजा फिर बहुत ब्रत बाद भगवान भर भी भोजन मास में में भी मैं यह यहि या रहा रहे राजा रानी रूप लगी लेकर वह व्रत विजयादशमी विधान विधि विशेष विष्णु वे श्रीकृष्ण शिव सब सभी समय स्नान से ही हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो गया होकर होता है होती होने

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