Gītāvalī-vimarśa: Tulasī kī kāvyakr̥ti Gītāvalī kī sarvāṅgapūrṇa samīkshā

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Navanīta Prakāśana, 1969 - Poetry - 192 pages

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अत अति अथवा अधिक अपनी अपने अभिव्यक्ति अयोध्या अर्थात् अलंकार आदि इस प्रकार इसका इसी उदाहरण उनकी उस एक एवं ऐसे कथन कर करके करते करने करि कवि कहा का का प्रयोग काण्ड काव्य किया है किसी की कुछ के द्वारा के प्रति के रूप में केलिए को कौशल्या गई गया गीत गीतावली में जा जाता है जाती जी जैसे जो तथा तुलसी तुलसी ने तुलसीदास तो दशरथ दिया दृष्टि देखिए दोनों नहीं नहीं है ने पद पर परन्तु परिस्थिति पृ० प्रकृति प्रस्तुत बन बिनु भक्ति भरत भाव भावना भाषा भी मन मार्मिक में ही यह या योजना रस रहा है राम के रामायण रावण री लक्ष्मण लिए वर्णन वह वाले विनय पत्रिका विभीषण विशेष वे व्यंजना शब्द सब समय सम्बन्ध सीता से सो हनुमान ही हुआ है हुई हुए है और है कि है है हैं हो होकर होता है होती होने हौं ह्रदय

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