Vidyāpati aura unakā kāvya: mahākavi Vidyāpati kī kāvya-kalā evaṃ jīvana-kr̥ta

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Gaṅga Pustakamālā Kāryālaya, 1966 - 135 pages

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अधिक अनेक अन्य अपनी अपने आदि इस इस प्रकार इसी उदाहरण उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उसमें एक एवं ओर और कबीर कर करते करने कवि की कवि ने कवियों कहा का का वर्णन कारण काव्य काव्य में किंतु किया है किसी की रचना की है कुछ कृष्ण के पदों के रूप में के लिये के साथ केवल को कोई गंगा गई गए गीति-काव्य चित्रण जनि जब जयदेव जाता है जाती जाते जीवन जो तथा तो था थी थे दिया देखिए दोनों द्वारा नहि नहीं नाम नायिका पद पद में पदावली में पदों की पदों में पर पूर्ण प्रयोग प्राप्त प्रेम मन मिथिला में भी में विद्यापति मैथिली यह रस राजा राधा राधा-कृष्ण रे लिखा वह विद्यापति के विषय शिव शिवसिंह श्रृंगार संस्कृत सभी समय सूरदास से सौंदर्य हम हिंदी ही हुआ है हुई हुए है कि हैं हो होता है होती होते होने ह्रदय

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