Lokakavi Tulasī

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Himāṃśu Prakāśana, 1977 - 248 pages
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On the Hindi poetry of the saint poet Tulasīdāsa, 1532-1623.

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अति अधिक अध्यात्म रामायण अनेक अपनी अपने अयोध्या आदर्श आदि इन इस इसी ईई उनकी उनके उन्हे एक एव एवं ऐसे कई कथा कर करके करता है करती करते करना करने कवि ने का प्रयोग का वर्णन काण्ड काव्य किया है है की है के लिये केवल कैकेयी को कोई गई गया है चरित चित्रण जा जाता है जीवन तथा तुलसी ने तुलसीदास ते तो था थे दशरथ दिया द्वारा धर्म नर नहि नही नहीं है नाम नारी पर पार्वती पुराण पैर प्रकार प्रसंग बाद बार भक्ति भरत भी मन महाभारत मानस में मे में में भी यह यही या रस रा राजा राम के रामचरितमानस रामायण मे रावण रूप लेई लेई लोक वह विभीषण वे वेद सब सभी समय सीता से सो हंई हनुमान ही हूई है और है कि है किन्तु है जो है तुलसी है राम है है हैं हो होकर होता है होते होने

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