Parinde

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Pīpulsa pabl. hāusa, 1960 - Short stories, Hindi - 162 pages
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अपनी अपने अब आंखें आंखों आज आया आयी इस उनकी उनके उन्हें उस उसकी उसके उसने उसे ऊपर एक और कभी कमरे में कर कहा का कि किन्तु किसी की कुछ कुछ देर कुर्ती के लिए को कोई क्या क्षण खिड़की गया था गया है गयी गये घर चुपचाप जब जा जाता है जाती जाने जूली जैसे जो डाक्टर तुम तो था थी थीं थे दिन दिनों दिया दूर देख देखा देर तक दोनों नहीं नहीं है निकी नीचे नीरजा ने पर पहले पास पीछे फिर बहुत बात बाद बानो बाबू बार बाहर बिट्टी बीच भी भीतर मां मिस मुझे मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यह याद रह रहा रहा था रहा है रही रहीं रहे रात लगा लगी लतिका लिया लेकिन वह वे शायद संग सब सा सामने सिर सी से स्वर हम हवा हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है है हैं हो गया

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